अमर उजाला काव्य डेस्क
आज मुश्किल था सँभलना ऐ दोस्त
तू मुसीबत में अजब याद आया
- नासिर काज़मी
तुझे घाटा न होने देंगे कारोबार-ए-उल्फ़त में
हम अपने सर तिरा ऐ दोस्त हर एहसान लेते हैं
- फ़िराक़ गोरखपुरी
वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का
जो पिछली रात से याद आ रहा है
- नासिर काज़मी
ऐ दोस्त हम ने तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद
महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी कभी
- नासिर काज़मी
आ कि तुझ बिन इस तरह ऐ दोस्त घबराता हूँ मैं
जैसे हर शय में किसी शय की कमी पाता हूँ मैं
- जिगर मुरादाबादी
Friendship Day: फ्रेंडशिप डे के दिन दोस्तों को भेजें ये शेर