अमर उजाला काव्य डेस्क
सुना है ऐसे भी होते हैं लोग दुनिया में
कि जिन से मिलिए तो तन्हाई ख़त्म होती है
- इफ्तिखार शफ़ी
जब दोस्ती होती है तो दोस्ती होती है
और दोस्ती में कोई एहसान नहीं होता
- गुलज़ार
तोड़ कर आज ग़लत-फ़हमी की दीवारों को
दोस्तो अपने तअ'ल्लुक़ को सँवारा जाए
- संतोष खिरवड़कर
दोस्ती को बुरा समझते हैं
क्या समझ है वो क्या समझते हैं
- नूह नारवी
दोस्त दो-चार निकलते हैं कहीं लाखों में
जितने होते हैं सिवा उतने ही कम होते हैं
- लाला माधव राम जौहर
Urdu Shayari: शकील बदायूंनी के चुनिंदा शेर