अमर उजाला काव्य डेस्क
वक़्त है इक रेल-गाड़ी की तरह
जिस ने रोका उस का रस्ता मर गया
- तौसीफ ताबिश
तेरी आँखों की बेचैनी मिरी ज़ंजीर थी लेकिन
खड़ी थी रेल-गाड़ी और जाना भी ज़रूरी था
- कमल हातवी
रेल-गाड़ी के सिगनलों की तरह
चलता रुकता हुआ सफ़र अपना
- जौहर तिम्मापुरी
किसी को गाँव से परदेस ले जाएगी फिर शायद
उड़ाती रेल-गाड़ी ढेर सारा फिर धुआँ आई
- मुनव्वर राना
Mirza Ghalib: मिर्ज़ा ग़ालिब के आसान भाषा में शेर