Urdu Poetry: काएनात यानी ब्रह्मांड पर चुनिंदा शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क

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ख़ुदा की इतनी बड़ी काएनात में मैं ने
बस एक शख़्स को माँगा मुझे वही न मिला
- बशीर बद्र

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मैं डूब जाऊँ समुंदर की तेज़ लहरों में
किनारे रक्खी हुई काएनात रह जाए
- शकील आज़मी

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मुझे पहले तो लगता था कि ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत काएनाती मसअला है
- उमैर नजमी

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तो दिल में बुझने सी लगती है काएनात तमाम
कभी कभी जो मुझे तू बुझा सा लगता है
- उबैदुल्लाह अलीम

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हयात ले के चलो काएनात ले के चलो
चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो
- मख़दूम मुहिउद्दीन

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Urdu Shayari: शायरों ने कहे दिल के हालात पर शेर

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