Urdu Poetry: भरोसे पर कहे शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क  

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दिल को तिरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
- अहमद फ़राज़ 

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अगर वफ़ा पे भरोसा रहे न दुनिया को
तो कोई शख़्स मोहब्बत का हौसला न करे
- क़तील शिफ़ाई 

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अपने मेआ'र तक न पहुँचा मैं
मुझ को ख़ुद पर बड़ा भरोसा था
- जौन एलिया 

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वो और मोहब्बत से मुझे देख रहा हो
क्या दिल का भरोसा मुझे धोका ही हुआ हो
- ज़ेब ग़ौरी 

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हर-चंद ए'तिबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए
- जाँ निसार अख़्तर 

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Urdu Poetry: कश्ती पर शायरों के चुनिंदा शेर

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