अमर उजाला काव्य डेस्क
मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे
मैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँ-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे
- शकील बदायूनी
बस मुझे यूँही इक ख़याल आया
सोचती हो तो सोचती हो क्या
- जौन एलिया
होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
- निदा फ़ाज़ली
उस के दिल पर भी कड़ी इश्क़ में गुज़री होगी
नाम जिस ने भी मोहब्बत का सज़ा रक्खा है
- हकीम नासिर
Urdu Poetry: आज के चुनिंदा शेर