अमर उजाला काव्य डेस्क
मित्रों का अविश्वास करना बुरा है, उनसे छला जाना कम बुरा है।
विद्वानों और लेखकों के सामने सरलता सबसे बड़ी समस्या होती है।
स्वार्थ हर तरह की भाषा बोलता है, हर तरह की भूमिका अदा करता है, यहां तक कि नि:स्वार्थता की भाषा भी नहीं छोड़ता।
सतत चिंताशील व्यक्ति का कोई मित्र नहीं बनता।
Urdu Poetry: आज के चुनिंदा शेर