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अपने आप में
एक ओछी चीज़ है समय
चीज़ों को तोड़ने वाला
मिटाने वाला बने-बनाए
महलों मकानों
देशों मौसमों
और ख़यालों को
मन से ज्यादा
तुम्हें कोई और नहीं जानता
उसी से पूछकर जानते रहो
अब क्या होगा इसे सोच कर, जी भारी करने मे क्या है,
जब वे चले गए हैं ओ मन, तब आँखें भरने मे क्या है।
आराम से भाई ज़िन्दगी
ज़रा आराम से
तेज़ी तुम्हारे प्यार की बर्दाशत नहीं होती अब
इतना कसकर किया आलिंगन
जिन्दगी में कोई बड़ा सुख नहीं है,
इस बात का मुझे बड़ा दु:ख नहीं है
कुछ लिख के सो, कुछ पढ़ के सो,
तू जिस जगह जागा सवेरे,
उस जगह से कुछ बढ़ के सो
कई बार मरने से जीना बुरा है
कि गुस्से को हर बार पीना बुरा है
कितने भी गहरे रहे गत
हर जगह प्यार जा सकता है
कितना भी भ्रष्ट ज़माना हो
हर समय प्यार भा सकता है
क्लासिक शायरों के चुनिंदा अशआर