Urdu Poetry: सफ़र पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं
- निदा फ़ाज़ली
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
- निदा फ़ाज़ली
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
- अहमद फ़राज़
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा
- गुलज़ार
इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
हम न सोए रात थक कर सो गई
- राही मासूम रज़ा
Urdu Poetry: खिड़की पर चुनिंदा शेर