Urdu Poetry: आज के चुनिंदा शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क

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हम ने देखा ही था दुनिया को अभी उस के बग़ैर
लीजिए बीच में फिर दीदा-ए-तर आ गए हैं
- इरफ़ान सिद्दीक़ी

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कैसे कह दूँ कि मुलाक़ात नहीं होती है
रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती है
-
शकील बदायूंनी

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ये मोहब्बत की कहानी नहीं मरती लेकिन
लोग किरदार निभाते हुए मर जाते हैं
- अब्बास ताबिश

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जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
- जौन एलिया

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ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम
मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते हैं
- इमाम बख़्श नासिख़

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Urdu Poetry: रूठे हुए रिश्तों को मनाएं इन शेर के साथ

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