Urdu Poetry: रेल पर चुनिंदा शेर
किसी को गाँव से परदेस ले जाएगी फिर शायद
उड़ाती रेल-गाड़ी ढेर सारा फिर धुआँ आई
- मुनव्वर राना
'अंजुम' तुम्हारा शहर जिधर है उसी तरफ़
इक रेल जा रही थी कि तुम याद आ गए
- अंजुम रहबर
उस एक छोटे से क़स्बे पे रेल ठहरी नहीं
वहाँ भी चंद मुसाफ़िर उतरने वाले थे
- जमाल एहसानी
रेल की गहरी सीटी सुन कर
रात का जंगल गूँजा होगा
- नासिर काज़मी
जाने किस की आस लगी है जाने किस को आना है
कोई रेल की सीटी सुन कर सोते से उठ जाता है
- साबिर वसीम
Inspirational Quotes: ये हैं इस हफ़्ते के प्रेरणादायक विचार