रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं से चुनिंदा पंक्तियां
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।
तुम स्वयं मृत्यु के मुख पर चरण धरो रे
जीना हो तो मरने से नहीं डरो रे
परम्परा चीनी नहीं मधु है
वह न तो हिन्दू है, ना मुस्लिम
खेल में तुमको पुलक-उन्मेष होता है,
लहर बनने में सलिल को क्लेश होता है।
जब नाश मनुज पर छाता है,
पहले विवेक मर जाता है।
Urdu Poetry: आज के चुनिंदा शेर