Hindi Poetry: केदारनाथ अग्रवाल की कविता से चुनिंदा पंक्तियां
पहला पानी गिरा गगन से
उमड़ा आतुर प्यार,
हवा हुई, ठण्डे दिमाग के जैसे खुले विचार।
हमें आजाद जीना है
इसी से आज मरते हैं।
हमारी जिन्दगी के दिन,
हमारे होश के दिन हैं।
ओस-बूंद कहती है; लिख दूं
नव-गुलाब पर मन की बात।
कवि कहता है : मैं भी लिख दूं
प्रिय शब्दों में मन की बात।
ऐसे आओ
जैसे गिरि के श्रृंग शीश पर
रंग रूप का क्रीट लगाये
बादल आए।
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