250 साल पुराने इन फूड के पीएम भी दिवाने जयपुर के जौहरी बाजार में स्थित लक्ष्मी मिष्ठान भंडार है, जहां वर्ल्ड फेमस पनीर घेवर बनता है जयपुर के लक्ष्मी भंडार में घेवर मुगल काल से ही बनाया जा रहा है पनीर घेवर आज पीएम मोदी से लेकर अमिताभ बच्चन और कई बॉलीवुड सेलिब्रिटीज को पसंद है अजमेर में कढ़ी-कचौरी बेहद प्रसिद्ध है. कोटा में हींग कचौरी बनाने की शुरुआत करीब 80 साल पहले मानी जाती है कोटा शहर में करीब 1000 बड़ी-छोटी दुकानों पर करीब 2 लाख कचौरी रोज बिकती है. ब्यावर में सबसे पहले 1938 में तिलपट्टी बनाने का श्रेय रामधन भाटी को जाता है तिलपट्टी का स्वाद देश ही नहीं बल्कि सात समुंदर पार विदेशी लोगों की जुबान पर भी चढ़ चुका है. हींग कचौरी को 'कोटा की रानी' के नाम से बुलाते हैं वहीं बेसन के मोटे कड़क सेव को कोटा में कड़के नाम से जाना जाता है. जिसे 'कोटा का राजा' कहा जाता है हींग कचौरी बनाने की शुरुआत करीब 120 साल पहले सन 1902 में हुई थी 250 साल पुराने इन फूड के पीएम भी दिवाने