73 साल के रानिल विक्रमसिंघे श्रीलंका के 26वें प्रधानमंत्री बने हैं। संसद में उनके पास केवल एक सीट है। पढ़िए उन नेताओं के बारे में जो महज एक सीट के साथ मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बन गए।
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पांचवी बार श्रीलंका की सत्ता संभाल रहे विक्रमसिंघे यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के सांसद हैं। पिछले चुनाव में इस पार्टी को कोई सीट नहीं मिली थी। बाद में, संचयी राष्ट्रीय वोट के आधार पर यूएनपी को एक सीट मिली थी।
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क्या आप जानते हैं कि भारत में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब सबसे बड़ी पार्टी सत्ता में नहीं पहुंची। यहां तक कि एक राज्य में तो एक बार निर्दलीय विधायक राज्य के मुख्यमंत्री बन गए थे।
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झारखंड में 2005 के चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिला था। पहले शिबू सोरेन फिर अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री बने। 2006 में तीन निर्दलीयों ने मुंडा सरकार से समर्थन वापस ले लिया और निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा मुख्यमंत्री बन गए।
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1996 के लोकसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। 161 सीट जीतकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी। अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री बने। वाजपेयी सदन में बहुमत नहीं जुटा पाए और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
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नए प्रधानमंत्री बने थे एचडी देवगौड़ा। देवगौड़ा जनता दल से आते थे, जिसके उस वक्त महज 46 सांसद थे। इसके बाद भी जनता दल के एक नहीं बल्कि दो-दो प्रधानमंत्री बने। पहले देवगौड़ा और बाद में इंद्र कुमार गुजराल।
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बिहार में फिलहाल एनडीए की सरकार है और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं। 77 विधायकों के साथ भाजपा यहां सबसे बड़ी पार्टी है। वहीं, राजद के 76 और नीतीश की पार्टी जदयू के सिर्फ 45 विधायक हैं।