अमर उजाला
Sat, 27 November 2021
केंद्र सरकार ने पराली जलाने को अपराध मुक्त कर दिया है। यह किसानों की मुख्य मांगों में से एक थी।
पराली जलाना पर्यावरण प्रदूषण का कारक बनता है। इससे मीथेन, कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड, पार्टिकुलेट मेटर का उत्सर्जन होता है।
एक टन पराली जलाने से तीन किलो पार्टिकुलेटर, 60 किलो कार्बन मोनो ऑक्साइड, 1460 किलो कार्बन डाइ ऑक्साइड, दो किलो सल्फर डाइ ऑक्साइड, 199 किलो राख उत्सर्जित होती है।
एक टन धान की पराली जलाने से मिट्टी में से 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फास्फोरस, 25 किलो पोटेशियम, 1.2 किलो सल्फर नष्ट हो जाते हैं।
पराली जलाने से फेफड़े की समस्या, सांस लेने में तकलीफ व कैंसर जैसे रोक भी हो सकते हैं।
ये हैं दुनिया के अजीबोगरीब कानून