नहीं मिला टिकट,अब क्या होगा नकवी का भविष्य?

अमर उजाला

Sun, 5 June 2022

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नकवी को नहीं मिला टिकट

भाजपा ने रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव के लिए भी प्रत्याशी का भी एलान कर दिया। पहले चर्चा थी कि मुख्तार को रामपुर से लोकसभा का उपचुनाव लड़ाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में सियासी गलियारों में मुख्तार अब्बास के भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। 
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मुख्तार अब्बास नकवी ने की है पत्रकारिता की पढ़ाई

मुख्तार अब्बास नकवी का जन्म 15 अक्टूबर 1957 को प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में हुआ था। मुख्तार ने पत्रकारिता की पढ़ाई की है। उन्होंने आठ जून 1983 को सीमा से शादी की। अब दोनों का एक बेटा भी है। 
 
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1975 में हुई राजनीतिक सफर की शुरुआत

मुख्तार अब्बास नकवी के राजनीतिक सफर की शुरुआत 1975 से हुई थी। तब उन्होंने देश में लागू किए गए आपातकाल का विरोध किया था और इसके लिए जेल भी गए थे। छात्रनेता रहते हुए वह जनता पार्टी के कार्यक्रमों और आंदोलनों में शामिल होते थे।
 
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1980 में पहली बार लड़े चुनाव

1980 में उन्होंने जनता पार्टी (सेक्यूलर) के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। इसके बाद अयोध्या से 1980 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव निर्दलीय लड़ा, लेकिन हार गए।
 
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1998 में बने सूचना प्रसारण मंत्री

 1998 में रामपुर से भारतीय जनता पार्टी ने मुख्तार अब्बास नकवी को टिकट दिया और वह चुनाव जीत गए। तब उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री बनाया गया था। 
 
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2014 से हैं केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री 

2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई तो मुख्तार अब्बास नकवी को अल्पसंख्यक राज्यमंत्री बनाया गया था। इसके बाद 2019 में फिर से जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभाली तो मुख्तार अब्बास नकवी को फिर से केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री बनाया गया। 
 

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अब क्या होगा?

भाजपा में चार बड़े मुस्लिम नेता हैं। शहनवाज इस वक्त बिहार सरकार में मंत्री हैं। मुख्तार अब्बास नकवी के साथ-साथ एमजे अकबर और जफर इस्लाम का राज्यसभा कार्यकाल पूरा हो रहा है। तीनों को भाजपा ने दोबारा प्रत्याशी नहीं बनाया है। ऐसे में मुख्तार अब्बास को लेकर तीन तरह के कयास लग रहे हैं…
 
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मनोनीत सांसद बनने का विकल्प

राज्यसभा में 12 मनोनीत सांसद भी होते हैं। इन्हें राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है।  ऐसे में यह संभव है कि भाजपा मुख्तार को राष्ट्रपति की ओर से नामित कराकर फिर से राज्यसभा भेज दे और मौजूदा जिम्मेदारी को कायम रखा जाए।
 
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संगठन में मिल सकती है जिम्मेदारी

इस साल गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। 2024 में लोकसभा चुनाव भी है। ऐसे में मुख्तार अब्बास नकवी को संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
 

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संवैधानिक पद मिलने की भी अटकलें

सियासी गलियारे में यह भी चर्चा है कि मुख्तार अब्बास नकवी को भाजपा उपराष्ट्रपति चुनाव में उतार सकती है। साथ ही इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि मुख्तार अब्बास नकवी को किसी राज्य का राज्यपाल बनाया जा सकता है।
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