Alpha (B.1.1.7)
कोरोना वायरस का अल्फा (बी.1.1.7) वैरिएंट सबसे पहले साल 2020 के अंत में ब्रिटेन में सामने आया था। इसके बाद कुछ अन्य देशों में भी इसके मामले पाए गए। कोरोना टीके इसके खिलाफ काफी प्रभावी सिद्ध हुए हैं।
Image Credit : PTI (File)
Beta (B.1.51)
कोरोना का बीटा वैरिएंट सबसे पहले मई 2020 में दक्षिण अफ्रीका में सामने आया था। यह मूल वायरस के मुकाबले आसानी से फैल सकता है लेकिन संक्रमित मरीज के गंभीर बीमार होने की आशंका काफी कम होती है।
Image Credit : PTI (File)
Gamma (P.1)
नवंबर 2020 में ब्राजील में गामा वैरिएंट सामने आया था। महीने के अंत तक यह अमेरिका भी पहुंच चुका था। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार यह एक बार संक्रमित हो चुके लोगों को फिर से संक्रमित कर सकता है।
Image Credit : PTI (File)
Delta (B.1.617.2)
कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट अभी तक का सबसे खतरनाक स्ट्रेन साबित हुआ है। अक्तूबर 2020 में भारत में सामने आया ये वैरिएंट अप्रैल में शुरू हुई महामारी की दूसरी बेहद भयावह लहर का कारण बना था।
Image Credit : PTI (File)
Lambda (C.37)
कोरोना वायरस का यह वैरिएंट सबसे पहले दिसंबर 2020 में पेरु में सामने आया था। 14 जून 2021 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे लैम्डा नाम दिया था और 'वैरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट' की श्रेणी में रखा था।
Image Credit : PTI (File)
संविधान दिवस: महान परंपरा, अखंड धारा की आधुनिक अभिव्यक्ति