किस्से कहानियों, अफसानों में काला ताजमहल बेशक तामीर हुआ हो, लेकिन हकीकत में इसके सबूत अब तक सामने नहीं आए हैं।
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अलग-अलग दावों के मुताबिक, मुगल बादशाह ने अपनी तीसरी बीवी मुमताज महल की तरह अपने लिए भी एक मकबरा बनाने की बात सोची थी।
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इसके बारे में ताज के गाइड बताते हैं कि शाहजहां ने नदी के उस पार काले संगमरमर से बने एक मकबरे का सपना देखा था, लेकिन औरंगजेब ने इसे बनाने से पहले ही शाहजहां को कैद कर लिया था।
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सबसे पहले काले ताजमहल का जिक्र फ्रांसीसी यात्री जीन बापतीस्त टेवरनियर ने किया था। वो 1665 में आगरा गए थे और उस दौरान उन्होंने अपने लेखन में इसका जिक्र किया है। हालांकि वर्तमान के पुरातत्वविद इसे सच नहीं मानते।
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ताजमहल के पीछे यमुना किनारे महताब बाग में 1996 में हुए उत्खनन और अब साइंटिफिक क्लीयरेंस के बाद महताब बाग को ताजमहल का ही ग्रांड डिजाइन माना जा रहा है।
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एएसआई और वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड ने इसको लेकर सफाई दी है कि काला ताज कभी अस्तित्व में नहीं था। महताब बाग ताज के चार बाग शैली के मुगल गार्डन की तरह का ही बागीचा रहा है।
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एएसआई के पूर्व निदेशक पीवीएस सेंगर ने कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेजों, आर्कियोलॉजी और आर्किटेक्चर के लिहाज से काले ताज का अस्तित्व नहीं है। साइंटिफिक क्लीयरेंस से काले ताज के मिथक झूठ साबित हुए है।