अमर उजाला
Fri, 7 October 2022
शिवसेना की दशहरा रैली में एकनाथ शिंदे के मंच पर उद्धव ठाकरे के सगे भाई जयदेव ठाकरे, उद्धव की भाभी स्मिता ठाकरे और उनके बेटे भी पहुंचे।
ठाकरे परिवार की इस टूट के कई मायने निकाले जा रहे हैं। दोनों भाषणों के भी राजनीतिक मायने तलाशे जा रहे हैं।
जल्द ही बीएमसी चुनाव होने हैं। जहां वर्षों से शिवसेना का दबदबा है। इस रैली का बीएमसी चुनाव पर भी असर पड़ सकता है।
उद्धव और शिंदे दोनों की रैलियों में भीड़ दिखाई दी। भीड़ के पैमाने पर किसी एक की रैली को सफल या असफल नहीं करार दिया जा सकता है।
शिवसेना के नाम और चुनाव निशान तीर-कमान पर दोनों गुटों की दावेदारी पर रैली का कोई असर नहीं होना है। दोनों गुटों को अपनी दावेदारी चुनाव आयोग में साबित करनी है।
चुनाव आयोग ही ये फैसला करेगा कि आखिर शिवसेना नाम, झंडे और चुनाव निशान का इस्तेमाल कौन सा गुट करेगा।
अब तक के हालात में शिंदे गुट की दावेदारी थोड़ी मजबूत दिखाई देती है।
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