अमर उजाला
Sun, 22 May 2022
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में आलोरानी सरकार ने टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
वह भाजपा प्रत्याशी स्वपन मजूमदार के खिलाफ खड़ी हुई थीं। चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
चुनाव में हार के बाद उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जहां उनकी नागरिकता को लेकर खुलासा हुआ।
जांच में सामने आया कि आलो रानी बांग्लादेशी नागरिक हैं। उनका नाम भारत की मतदाता सूची में होने के साथ ही साथ बांग्लादेश की मतदाता सूची में शामिल है।
जांच में पता चला कि उनके पिता समर हलदर बांग्लादेश के नचराबाद के रहने वाले थे। 2012 में भारतीय मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के बाद वह अपने पति के साथ रहने लगीं।
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा, दोहरी नागरिकता भारत में लागू नहीं है, लिहाजा उन्हें भारतीय नागरिक नहीं माना जा सकता है।
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