अमर उजाला
Mon, 22 May 2023
हरियाणा के फतेहाबाद का गांव काजलहेड़ी कछुओं के सहारे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। करीब 100 साल पुराने कछुए गांव के तालाब में पल रहे हैं। ताली बजाते ही कछुए पानी से बाहर आ जाते हैं।
बिश्नोई बहुल गांव होने के कारण यहां जीव रक्षकों की कमी नहीं है। यही जीवरक्षक इन कछुओं की न केवल रक्षा करते हैं, बल्कि इनके खाने-पीने की व्यवस्थाओं को भी पर्याप्त रखते हैं।
गांव गोरखपुर स्थित परमाणु संयंत्र तैयार कर रही न्यूक्लियर पॉवर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने तालाब के चारोंओर जाली लगवाई, एक साल में 25 से 30 नए कछुओं ने भी जन्म लिया, अधिकांश कछुए भारतीय नरम खोल प्रजाति के हैं।
ग्रामीण रमेश गोदारा बताते हैं कि इन कछुओं के बारे में जानकारी मिलने पर बाहर से भी लोग गांव आते हैं। चंडीगढ़-दिल्ली से आने वाले सरकारी विभागों से लेकर निजी कंपनियों तक के अधिकारी यहां दौरा जरूर करते हैं।
लॉरेंस बिश्नोई की टॉप 10 टारगेट लिस्ट, सलमान खान का भी नाम