क्यों खास होती हैं कांजीवरम साड़ियां?

अमर उजाला

Wed, 28 April 2021

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कांजीवरम साड़ियां भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के कांचीपुरम शहर में बनाई जाती हैं

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साड़ी के बुनकरों को महर्षि मार्कण्डेयजी का वंशज माना गया है जो कमल के फूल के रेशों से देवताओं के लिए बुनाई किया करते थे

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कुछ ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार राजा कृष्णदेव राय के समय से कांजीवरम साड़ियां अपनी श्रेष्ठ कारीगरी के लिए जानी जाने लगीं

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सिल्क साड़ी का प्रमुख उत्पादन केंद्र होने के कारण कांचीपुरम को सिल्क सिटी के नाम से भी जाना जाता है

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हर कांजीवरम साड़ी को तैयार करने में श्रेष्ठ क्वालिटी के मलबरी सिल्क का प्रयोग किया जाता है

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कांजीवरम सिल्क साड़ियां पारम्परिक हाथ की बुनाई से तैयार की जाती हैं जिसे कोरवई तकनीक भी कहते हैं

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एक असली कांजीवरम साड़ी को तैयार करने में कम से कम एक हफ्ते का समय लगता है

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कांजीवरम की सबसे बड़ी खासियत होती है उसकी जरी, कांजीवरम को हमेशा सोने की जरी के साथ ही बुना जाता है

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जहां एक आम साड़ी की चौड़ाई 45 इंच होती है, वहीं कांजीवरम साड़ी की चौड़ाई 48 इंच रखी जाती है

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बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा रेखा की पहली पसंद हैं कांजीवरम साड़ियां

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दक्षिण भारत की शादियों में कांजीवरम साड़ी को दुल्हन का अहम परिधान माना जाता है

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कांजीवरम दिनभर पहने रहने पर भी नहीं सिकुड़ती और आप साधारण पानी से भी इसे धो सकते हैं

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 कांजीवरम साड़ी की कीमत 6000 रुपये से शुरू होती है

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पार्थ समथान का अनोखा फैशन स्टेटमेंट

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