डॉक्टरी छोड़ फिल्म जगत के नटसम्राट कैसे बने श्रीराम लागू? श्रीराम लागू किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं, उन्होंने अपने सपोर्टिंग रोल्स से फिल्मों में अलग ही मुकाम हासिल किया श्रीराम लागू 16 1927 सितंबर को आज ही के दिन इस दुनिया को अलविदा कह दिया था मराठी थिएटर में तो उन्हें 20वीं सदी के सबसे बेहतरीन कलाकारों में गिना जाता है सिनेमा के अलावा मराठी, हिंदी और गुजराती रंगमंच से जुड़े रहे श्रीराम लागू ने 20 से अधिक मराठी नाटकों का निर्देशन भी किया श्रीराम लागू नाक, कान और गले के बेहतरीन सर्जन थे, उन्हें बचपन से ही फिल्मों का बेहद शौक था श्रीराम लागू अपने करियर की शुरुआत 'आहट: एक अजीब कहानी' से की थी। यह फिल्म साल 1971 में आई थी श्रीराम लागू को 'नटसम्राट' नाटक के लिए भी याद किया जाता है मनोरंजन