अमर उजाला
Tue, 8 August 2023
स्कूलों की ही तरह मदरसों में भी पढ़ाई होती है
यहां भी पहली-दूसरी की क्लास लगती है
यहां शुरुआत ऊला से की जाती है
इसके बाद सानिया होता है, इसे हाई स्कूल भी कहा जा सकता है
सानिया के बाद सादेसा, राबया, खामेशा, साबेयाऔर सामेन की क्लास होती है
सादेसा को ग्रेजुएशन कहा जा सकता है, जिसमें आलिम की डिग्री मिलती है
राबया और खामेशा को तक पढ़ने वालों को मौलवी की डिग्री दी जाती है
साबेया और सामेन तक पढ़ने वालों को फाजिल की डिग्री दी जाती है
फाजिल को एमए भी कहा जा सकता है
इसके बाद भी किसी को आगे पढ़ना हो तो वह रिसर्च कर सकता है
रिसर्च करने के बाद उसे मुफ्ती की डिग्री मिल जाती है
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