अमर उजाला
Fri, 28 July 2023
अपोलो-11 ने चांद तक पहुंचने में करीब चार दिन का समय लगाया था
इसके बाद अमेरिका का न्यू होराइजन प्लूटो मिशन चांद तक पहुंचने में आठ घंटे का समय लगाया था
भारत को जहां महीनों लग रहे हैं वहीं अमेरिका कुछ घंटों में ही चांद का सफर तय कर रहा है
चांद पर पहुंचने में कितना समय लगेगा इसका कारण रॉकेट की किस्म पर निर्भर करता है
इसके अलावा रॉकेट को ऊर्जा देने वाले ईंधन के प्रकार और उसकी मात्रा पर भी निर्भर करता है
कम दिनों में चांद पर पहुंचने के लिए जितना ज्यादा ईंधन जलेगा उतना ही ज्यादा खर्च होगा
छोटे रॉकेट चांद पर पहुंचने के लिए पृथ्वी के गुरुत्वकर्षण शक्ति का इस्तेमाल करते हैं
ऐसे में उनका ज्यादातर समय परिक्रमा में ही बीत जाता है
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