चांद पर पहुंचने में अमेरिका-रूस से भारत को क्यों लगता है ज्यादा समय?

अमर उजाला

Fri, 28 July 2023

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  • इस समय पूरी दुनिया की निगाहें भारत के चेंद्रयान-3 पर टिकी हुई है
  • यह लगभग 40 से 42 दिनों में चांद की सतह पर पहुंचेगा

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  • साल 1969 में पहली बार इंसान चांद पर पहुंचा था  
  • इस मिशन का नाम अपोलो-11 रखा गया था

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अपोलो-11 ने चांद तक पहुंचने में करीब चार दिन का समय लगाया था

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इसके बाद अमेरिका का न्यू होराइजन प्लूटो मिशन चांद तक पहुंचने में आठ घंटे का समय लगाया था

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भारत को जहां महीनों लग रहे हैं वहीं अमेरिका कुछ घंटों में ही चांद का सफर तय कर रहा है

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चांद पर पहुंचने में कितना समय लगेगा इसका कारण रॉकेट की किस्म पर निर्भर करता है

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इसके अलावा रॉकेट को ऊर्जा देने वाले ईंधन के प्रकार और उसकी मात्रा पर भी निर्भर करता है

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कम दिनों में चांद पर पहुंचने के लिए जितना ज्यादा ईंधन जलेगा उतना ही ज्यादा खर्च होगा

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छोटे रॉकेट चांद पर पहुंचने के लिए पृथ्वी के गुरुत्वकर्षण शक्ति का इस्तेमाल करते हैं

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ऐसे में उनका ज्यादातर समय परिक्रमा में ही बीत जाता है

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