33 फीसदी पासिंग मार्क्स का क्या लॉजिक है?

अमर उजाला

Sat, 20 May 2023

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कभी सोचा है कि भारत में परीक्षाओं के पासिंग मार्क्स 33 फीसदी ही क्यों हैं?

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1858 में ब्रिटिश राज के तहत भारत में पहली मैट्रिक परीक्षा आयोजित की गई थी।

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उन्होंने सोचा कि उत्तीर्ण अंक क्या होना चाहिए। 

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उस वक्त ब्रिटेन में पासिंग मार्क्स 100 में से 65 अंक होते थे।

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अंग्रेज हमारी बुद्धि को अपना आधा समझते थे।

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अंग्रेजों ने सोचा था कि भारतीयों के पास केवल आधा आईक्यू हो सकता है।

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इस तरह पासिंग मार्क को 32.5 पर सेट किया, जो 65 का आधा था।
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बाद में 1861 में, इस 32.5 प्रतिशत को 33 फीसदी कर दिया गया।

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