RK Kar Case: एक नहीं होते जज, जस्टिस और मजिस्ट्रेट... समझें तीनों के बीच का फर्क
अमर उजाला
Mon, 20 January 2025
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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के आरजी कर मामले पर फैसले को लेकर सोमवार को सियालदह कोर्ट में सुनवाई हुई
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सियालदह कोर्ट के जज अनिरबन दास ने फैसला सुनाते हुए दोषी संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई
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आपने सुना होगा कि कोर्ट में मामलों की सुनवाई जज, जस्टिस या मजिस्ट्रेट करते हैं। क्या ये तीनों अलग-अलग होते हैं? या फिर ये तीनों एक दूसरे के पर्यायवाची हैं? आइए जानते हैं...
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न्यायालय में सिविल और क्रिमिनल, दो तरह के मामले आते हैं। सिविल मामलों में अधिकार और क्षतिपूर्ति की मांग की जाती है। वहीं क्रिमिनल मामलों में दंड की मांग की जाती है
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मजिस्ट्रेट
ये सिर्फ एक जिले के कानूनी मामलों को संभालते हैं, लेकिन न्यायाधीश के रूप में उतनी शक्ति नहीं रखते हैं। मजिस्ट्रेट फांसी या उम्रकैद की सजा नहीं दे सकते
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जस्टिस
न्यायपालिका में जस्टिस सर्वोच्च पद होता है, इसे हिंदी में न्यायमूर्ति कहा जाता है। ये हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करते हैं
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जज, मजिस्ट्रेट और जस्टिस में अंतर
वैसे तो ये तीनों ही मूल रूप से न्यायाधीश होते हैं, लेकिन वरिष्ठता और जिम्मेदारियों के आधार पर इनके ये पदनाम निर्धारित किए जाते हैं। हालांकि, इनकी नियुक्ति की प्रक्रिया अलग-अलग होती है
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