अमर उजाला
Mon, 2 October 2023
बिहार सरकार ने गांधी जयंती के अवसर पर जातिगत जनगणना की रिपोर्ट जारी की है
आइए जानते हैं जातिगत जनगणना के बारे में...
जातिगत जनगणना से मिलने वाले आंकड़ों से पिछड़ी जातियों को आरक्षण का फायदा देकर उन्हें मजबूत बनाया जा सकता है
इससे किसी भी जाति की आर्थिक, सामाजिक और शिक्षा की स्थिति का पता चल पाएगा
जाति के आधार पर जब आबादी की गिनती की जाती है तो इस प्रक्रिया को जातीय जनगणना कहते हैं
बिहार से पहले राजस्थान और कर्नाटक में भी जातीय जनगणना हो चुकी है
जातीय जनगणना की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी 27.13 फीसदी हैं
रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में 33 जातियां ओबीसी यानी पिछड़ा वर्ग और 113 जातियां अति पिछड़ा वर्ग में आती हैं।
बिहार में राजनीतिक दृष्टिकोण से भी जातिगत जनगणना का अहम रोल साबित होने वाला है
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