अमर उजाला
Fri, 14 April 2023
आंबेडकर जयंती के जरिए वंचितों के उत्थान में बाबा साहब के योगदान को याद किया जाता है।
पहली बार डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल, 1928 को पुणे में मनाई गई थी।
इसकी शुरुआत जनार्दन सदाशिव रणपिसे ने की थी, जो आंबेडकर के एक प्रबल अनुयायी और सामाजिक कार्यकर्ता थे।
देश के संविधान निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से प्रति वर्ष 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती पर देश में सार्वजनिक अवकाश रहता है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर एक राजनीतिज्ञ, दार्शनिक, अर्थशास्त्री और समाज सुधारक थे. जो कमजोर लोगों के अधिकारों के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे।
आंबेडकर जयंती को समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में भी जाना जाता है।
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