भारत के इस गांव में बजरंगबली की पूजा नहीं करते लोग, पीछे है रोचक कहानी

अमर उजाला

Wed, 9 August 2023

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आज हम आपको भारत के एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां आज भी लोग भगवान हनुमान की पूजा नहीं करते है। 
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यह जगह है उत्तराखंड के चमोली जिले में एतिहासिक द्रोणागिरी गांव। कहा जाता है कि आज भी यहां के ग्रामीण बजरंगबली से नाराज हैं। यही वहज है कि ग्रामीण अपने गांव में उनकी पूजा नहीं करते हैं।

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दरअसल, यह वही गांव है जहां भगवान हनुमान ग्रामीणों के देव पूज्य द्रोणागिरी पर्वत को उखाड़कर ले गए थे। ग्रामीण द्रोणागिरी पर्वत की प्राचीन काल से ही पूजा करते थे। रामायण काल के दौरान जब राम-रावण युद्ध के दौरान मेघनाद के दिव्य शस्त्र से लक्ष्मण मुर्छित हो गए थे।
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तब सुनैन वैद्य के कहने पर हनुमान द्रोणगिरी पर्वत पर संजीवनी बूटी लेने के लिए आए थे। हनुमान संजीवनी बूटी को पहचान नहीं पाए और पर्वत के आधे हिस्से को उखाड़ कर ले गए थे। तब से ग्रामीण भगवान हनुमान से खफा हैं। 

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द्रोणागिरी गांव चमोली जनपद के नीती घाटी में स्थित है। द्रोणगिरी पर्वत की ऊंचाई 7,066 मीटर है। यहां शीतकाल में भारी बर्फबारी होती है। जिससे ग्रामीण शीतकाल में छह माह तक चमोली जनपद के निचले क्षेत्रों में निवास करते हैं। 
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इसके बाद ग्रीष्मकाल में छह माह तक अपने पैतृक गांव में पहुंच जाते हैं। जोशीमठ-मलारी हाईवे पर 50 किलोमीटर की दूरी पर जुम्मा गांव स्थित है। यहां से द्रोणागिरी गांव के लिए पैदल ट्रेक जाता है। धौली गंगा को पार कर ग्रामीण करीब 10 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर अपने गांव द्रोणागिरी पहुंचते हैं। 

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यहां गांव में रामलीला का मंचन भी होता है, लेकिन हनुमान की एंट्री होते ही रामलीला का समापन कर दिया जाता है।

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