वो मंदिर जहां भोलेनाथ ने चंद्रमा को मस्तक पर किया था धारण, रोचक है कहानी
अमर उजाला
Mon, 7 August 2023
Image Credit : अमर उजाला
आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं कि जहां पर भगवान शिव ने अपने मस्तक पर चंद्रमा को धारण किया था।
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यह मंदिर है देवभूमि ऋषिकेश के चंद्रेश्वर नगर स्थित गंगा तट के पास चंद्रेश्वर महादेव। यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां श्रावण मास, शिवरात्रि और अन्य दिनों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
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बताया जाता है कि चंद्रदेव का विवाह राजा दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से हुआ था। इन्हें ही 27 नक्षत्र कहा जाता है। चंद्रमा को अपनी 27 पत्नियों में रोहिणी से अधिक प्रेम था। जिस कारण अन्य पत्नियों ने नाराज होकर अपने पिता दक्ष प्रजापति से इसकी शिकायत कर दी।
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इस पर दक्ष प्रजापति ने क्रोध में आकर चंद्रमा को श्राप दे दिया कि वह अपनी चमक खो देगा। कहा जाता है कि श्राप के कारण चंद्रमा क्षय रोग से ग्रसित होने लगे।
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जिसके बाद श्राप से मुक्ति पाने के लिए भटकते हुए चंद्रमा यहां गंगा तट के पास पहुंचे और भगवान शिव की आराधना शुरू की। करीब 10 हजार वर्ष तक तपस्या करने के बाद भगवान शिव चंद्रमा की तपस्या से प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन दिए।
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इसके बाद भगवान शिव ने चंद्रमा को दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति दी और चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण कर लिया। इसलिए इस मंदिर में स्थित स्वयंभू शिवलिंग को चांदी का मुकुट लगाया जाता है। इस कारण ही मंदिर के आस-पास के इलाके को चंद्रेश्वर नगर के नाम से जाना जाता है।