अमर उजाला
Sun, 2 April 2023
दो अप्रैल 2011 का दिन शायद ही किसी भारतीय क्रिकेट फैन को नहीं याद होगा, यह वो दिन है जब टीम इंडिया ने इतिहास रचा था
2011 में भारत में ही वनडे विश्व कप खेला गया था, टीम इंडिया ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई थी
धोनी के अगुआई में भारत ने क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया, सेमीफाइनल में पाकिस्तान को हराते हुए फाइनल में जगह बनाई थी
फाइनल मुकाबला दो अप्रैल को मुंबई के वानखेड़े में खेला गया था, धोनी की अगुआई में भारतीय टीम के सामने श्रीलंका की चुनौती थी
श्रीलंका की कमान कुमार संगकारा संभाल रहे थे और टीम में लसिथ मलिंगा, महेला जयवर्धने, तिलकरत्ने दिलशान, उपुल थरंगा, नुवान कुलसेखरा जैसे कई दिग्गज खिलाड़ी थे
पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने जयवर्धने के नाबाद 103 रन और संगकारा के 48 रन की बदौलत 50 ओवर में छह विकेट गंवाकर 274 रन बनाए थे
भारत की ओर से जहीर खान और युवराज सिंह ने दो विकेट लिए थे, जबकि हरभजन सिंह को एक विकेट मिला था
जवाब में भारतीय टीम ने सातवें ओवर तक वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर के विकेट गंवा दिए थे, दोनों को मलिंगा ने आउट किया था
इसके बाद गौतम गंभीर और कोहली ने 83 रन और फिर गंभीर और धोनी ने 109 रन की साझेदारी कर भारत को जीत की दहलीज तक पहुंचाया था
कोहली 35 रन बनाकर आउट हुए, जबकि गंभीर शतक से चूक गए थे और 97 रन बनाकर परेरा की गेंद पर क्लीन बोल्ड हुए
इसके बाद धोनी और युवराज ने मिलकर टीम इंडिया को जीत दिलाई थी, धोनी 91 रन और युवी 21 रन बनाकर नाबाद रहे थे
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इस तरह टीम इंडिया ने 1983 के बाद दूसरी बार वनडे वर्ल्ड कप जीता था, साथ ही दुनिया में अपनी छाप छोड़ी थी
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