शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरेंसी बिल लाने की तैयारी और आरबीआई की सख्ती के चलते जेबपे, यूनोकॉइन और बीटीसीएक्स इंडिया जैसे कई क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज भारत से निकलने की फिराक में हैं।
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यूएई-सिंगापुर पहली पसंद
रिपोर्ट की मानें तो एक्सचेंज अपने कार्यालयों को भारत के बाहर स्थानांतरित करना चाह रहे हैं। इनकी पहली पसंद संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, डेलावेयर या बेलारूस को बताया जा रहा है।
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सलाहकारों से संपर्क में जुटे
भारत में क्रिप्टो प्रतिबंधित होने की आशंका के चलते एक्सचेंजों को यहां कारोबार करना सुगम नहीं लग रहा है। इसलिए देश से बाहर जाने की योजना के तहत ये अपने सलाहकारों से संपर्क कर रहे हैं।
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सरकार की तैयारी से खौफ
केंद्र की शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरेंसी बिल लाने की घोषणा ने निवेशकों को अपनी करेंसी बेचने के लिए प्रेरित किया तो एक्सचेंजों में खौफ है कि इससे उनके लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा।
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आरबीआई गवर्नर ने बताया खतरा
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गर्वनर शक्तिकांत दास ने बीते दिनों बयान देते हुए कहा था कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी से बहुत बड़ा खतरा पैदा होगा और इसे अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।
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प्रधानमंत्री ने भी चेताया था
सिडनी डायलॉग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी डिजिटल करेंसी को लेकर चेताया था। उन्होंने कहा था कि हमें मिलकर इस बात पर ध्यान देना होगा कि यह डिजिटल मुद्रा गलत हाथों में न चली जाए।
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विशेषज्ञों की क्या है राय
विशेषज्ञों का कहना है कि इस माहौल में एक्सचेंजों के पास दो विकल्प हो सकते हैं या तो कारोबार बंद कर दें या फिर किसी अन्य अधिकार क्षेत्र में चले जाएं।