अमर उजाला
Wed, 15 May 2024
पुराने समय से ही भारत में तवायफों की कई कहानियां सुनने को मिलते हैं जिन्हें जानकर हैरानी भी होती है
ऐसी ही एक मशहूर कहानी है इलाहाबाद की तवायफ जानकी बाई की लोग उन्हें छप्पन छुरी के नाम से जानते हैं
ज्यादातर लोगों को लगता है कि ये नाम नजरों से लोगों के दिल पर छुरियां चलाने वाली अदा को देखकर रखा गया होगा
लेकिन असल में इसकी वजह कुछ और है दरअसल जानकी बाई का जन्म 1880 में वाराणसी में हुआ था
जानकी के पिता ने जन्म के बाद ही मां-बेटी दोनों को छोड़ दिया था और उन्हें इलाहाबाद में एक कोठे में बेच दिया गया
मानकी अपनी बेटी को लिए उस कोठे पर आई और वहां ऐसी रम गई कि कुछ समय बाद वहां की मालकिन बन गईं
कोठे की जिंदगी से दूर रखने के लिए मानकी ने अपनी बेटी को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में दक्ष किया
जानकी बला की खूबसूरत थीं साथ ही उनकी सुरीली आवाज भी लोगों पर जादू करती थी
12 साल की उम्र में एक पुलिस कांस्टेबल उस पर रीझ गया और उसने यौन संबंध बनाने का प्रयास किया जिसमें वह नाकाम रहा
गुस्से में कांस्टेबल ने जानकी के चेहरे सहित पूरे शरीर पर छुरी से कुल 56 वार किए ऐसे में उनकी जान तो बच गई लेकिन चेहरे पर घाव के दाग रह गए
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