अमर उजाला
Mon, 15 January 2024
कही लोगों को लगता है कि टूटते और गिरते तारे एक ही होते हैं लेकिन इसमें बड़ा अंतर होता है
टूटता तारा ऐसे उल्का (मीटियोर) होते हैं जो अंतरिक्ष से हमारे वायुमंडल में आ जाते हैं और घर्षण के कारण जलने लगते हैं
ये टूटते तारे कभी धरती की सतह तक नहीं पहुंचते हैं क्योंकि इससे पहले ही ये जल जाते हैं
लेकिन कुछ उल्का इतने बड़े होते हैं कि ये जलने के बाद भी सतह तक पहुंच जाते हैं
ऐसे उल्कापिंड को ही लोग गिरते हुए तारे कहते हैं लेकिन अलग में ये कोई तारे नहीं मीटियोर्स होते हैं
तारे पृथ्वी से अरबों-खरबों किलोमीटर दूर होते हैं जो कभी धरती पर आकर नहीं गिर सकते
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