अमर उजाला
Thu, 29 September 2022
दरअसल, इस जीरो रुपये के नोट को छापने का आईडिया दक्षिण भारत की एक NGO का था
साल 2007 में भ्रष्टाचार के खिलाफ इस नोट को हथियार के रूप में शुरू किया गया था
तमिलनाडु में काम करने वाली एक एनजीओ ने करीब 5 लाख जीरो रुपये के नोट छापे थे
इन नोटों को हिंदी, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम चार भाषाओं में छापा गया था जिसे लोगों में बांट दिया गया
इस नोट पर भ्रष्टाचार के खिलाफ कई मैसेज लिखे थे। इन नोट पर लिखा था
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