अमर उजाला
Tue, 30 April 2024
यूं तो रंगों को लेकर लिंग भेद करना उचित नहीं है लेकिन फिर भी अक्सर देखा जाता है कि समाज में इस तरह की मानसिकता बनी हुई है
ज्यादातर लोग गुलाबी रंग को लड़कियों का रंग और नीले रंग को लड़कों का रंग मानते हैं
लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुलाबी रंग को लेकर ऐसी मानसिकता की शुरुआत कहां से हुई
दरअसल बात हिटलर के नाजी जर्मनी की है वहां बंदियों को रखने वाले ‘कंसंट्रेशन कैंप’ में पहचान के लिए अलग-अलग चिन्ह दिए जाते थे
यहूदियों को ‘पीले रंग का स्टार’ और होमोसेक्सुअल्स को गुलाबी रंग का ट्रायंगल दिया गया था
इसके बाद से गुलाबी रंग को होमोसेक्सुअलिटी से जोड़ा जाने लगा और इसे गैर मर्दों की पहचान कहा जाने लगा
इसके बाद यह रंग मर्दों से दूर होता गया और इसे लड़कियों का रंग माना जाने लगा
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