दूर आकाश में कैसे बनते हैं टिमटिमाते तारे? तारे का निर्माण गैस और धूल के विशाल बादल यानी नेबुला से होता है। गुरुत्वाकर्षण के कारण नेबुला में गैस और कण आपस में सिमटने लगते हैं यहां जैसे-जैसे घनत्व और तापमान बढ़ता है तो इस प्रक्रिया में एक "प्रोटोस्टार" का निर्माण होता है प्रोटोस्टार के केंद्र में तापमान करोड़ों डिग्री तक पहुंचने पर नाभिकीय संलयन जिसे फ्यूजन कहा जाता है उसकी शुरुआत होती है यहां हाइड्रोजन एटम आपस में मिलते हैं और हीलियम बनाते हैं। इसके बाद ऊर्जा के रूप में प्रकाश और गर्मी को छोड़ते हैं यही प्रक्रिया तारे को चमकदार और लंबे समय तक स्थिर बनाए रखती है बिजार न्यूज