हिमालय की झीलों पर इसरो का बड़ा खुलासा, खतरे की जताई आशंका

अमर उजाला

Tue, 23 April 2024

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हिमालय के पहाड़ों में भारी संख्या में ग्लेशियरों की मौजूद हैं इसलिए इसे दुनिया तीसरा ध्रुव भी कहा जाता है
 
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लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से यह इलाका बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहा है लगातार बर्फ पिघल रही है और ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं
 
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ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से पहाड़ों पर जगह-जगह पानी जमा हो जाता है जिसे ग्लेशियल लेक्स कहते हैं
 
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पानी जुड़ने से हिमालय में पुरानी ग्लेशियल लेक्स का आकार बढ़ रहा है जो खतरनाक साबित हो सकती हैं
 
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इन ग्लेशियल लेक्स से ग्लेशियल लेक्स आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOFS) का खतरा रहता है 
 
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केदारनाथ, चमोली और सिक्किम में हुए हादसे भी इसी का परिणाम थे, इसकी वजह से निचले इलाकों में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा रहता है
 
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ये ग्लेशियल लेक्स तब फूटती है जब इनमें कोई भारी चीज गिर जाए या इनकी दीवार टूट जाए 
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ISRO इन पर नजर रखता है ताकि खतरनाक ग्लेशियल लेक्स के फूटने से पहले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा सके
 
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इसरो के पास हिमालय पर मौजूद बर्फीली झीलों का 3-4 दशक का डेटा है जिससे पता चला है कि ये ग्लेशियल लेक्स लागातार पढ़ते जा रहा हैं
 
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