अमर उजाला
Sun, 24 September 2023
प्रज्ञान और विक्रम वापस जागेंगे या नहीं इसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है क्योंकि चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव रात के समय बेहद ठंडा रहता है
इसलिए चांद की ऐसी खौफनाक रात झेलने के बाद प्रज्ञान और विक्रम का जागना इतना आसान नहीं है
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर रात का हर पल चुनौती भरा होता है यहां तापमान माइनस 50 डिग्री से भी नीचे चला जाता है
ऐसे में देखना ये होगा कि प्रज्ञान और रोवर में लगे पेलोड इस खतरनाक ठंड को बर्दाश्त कर पाए हैं या नहीं
अगर रोवर और लैंडर जागते हैं तो यह इसरो के लिए बड़ी उपलब्धि होगी हालांकि लैंडिंग के बाद रोवर और विक्रम ने अपना काम खत्म कर लिया है
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