अमेरिका और रूस की तरह सीधे चंद्रमा पर क्यों नहीं जाता भारत?
अमर उजाला
Sat, 12 August 2023
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रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रासकास्माज ने भी चांद पर शुक्रवार को अपना अंतरिक्ष यान लूना-25 मून लैंडर भेजा है
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रूस के अंतरिक्ष प्रमुख यूरी बोरिसोव ने बताया कि लूना- 25 21 अगस्त को चांद की सतह पर उतर सकता है
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भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने चंद्रयान-3 बीते महीने 14 जुलाई 2023 को लॉन्च किया गया था, जो 23 अगस्त को चांद की सतह पर उतर सकता है
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सवाल यह है कि आखिर करीब एक महीने के बाद भी लॉन्च होने वाला लूना-25 चंद्रयान-3 से पहले चांद की सतह पर कैसे उतरेगा?
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धरती के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकलने के लिए बूस्टर या कहें शक्तिशाली रॉकेट यान के साथ उड़ते हैं
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अगर आप सीधे चांद पर जाना चाहते हैं, तो आपको बड़े और शक्तिशाली रॉकेट की जरूरत होगी और इसमें ईंधन की भी अधिक आवश्यकता होती है, जिसका सीधा असर प्रोजेक्ट के बजट पर पड़ता है
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अगर चंद्रमा की दूरी सीधे पृथ्वी से तय करेंगे तो हमें ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। नासा भी ऐसा ही करता है लेकिन इसरो का चंद्र मिशन सस्ता है, क्योंकि उसने चंद्रयान को सीधे चंद्रमा पर नहीं भेजा है
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एक निश्चित दूरी के बाद चंद्रयान को आगे की यात्रा अकेले ही पूरी करनी होती है। चीन हो या रूस, इनके सभी पुराने मिशन दो से चार दिन में पहुंच गए और सभी ने जंबो रॉकेट का इस्तेमाल किया गया
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चीन और अमेरिका 1000 करोड़ से ज्यादा खर्च करते हैं, लेकिन इसरो का रॉकेट 500-600 करोड़ में लॉन्च होता है
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