बिहार के इन नेताओं ने अपने दम पर बनाई पहचान

अमर उजाला

Thu, 25 November 2021

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भारत की राजनीति में बिहार का हमेशा से ही बड़ा योगदान रहा है। बिहार ने देश को कई दिग्गज नेता दिए हैं। ऐसे में आइए जानते हैं बिहार के उन नेताओं के बारे में जिन्होंने अपने दम पर पहचान बनाई...

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लालू प्रसाद यादव

राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को कौन नहीं जानता है। जेपी आंदोलन से जुड़ने के बाद उनकी राजनीति में पकड़ मजबूत और हुई। 29 साल की उम्र में वह सांसद बन कर सबसे युवा सांसद होने का खिताब अपने नाम किया। 1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बने। मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री रहे। 
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नीतीश कुमार

बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज (अब एनआईटी पटना) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद नीतीश कुमार ने बिहार राज्य विद्युत बोर्ड में नौकरी की। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। 1985 में नालंदा के हरनौत सीट से पहली बार विधायक बने। छह बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे।  
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हुकुमदेव नारायण यादव

ग्राम प्रधान से लेकर तीन बार विधायक और पांच बार लोकसभा सांसद..बिहार के दरभंगा जिले के बिजुली गांव में एक किसान परिवार में जन्मे हुकुमदेव नारायण यादव ने यूं ही नहीं फर्श से अर्श तक का सफर तय किया। 1960 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। 1967 में पहली बार विधायक बने। 1977 में पहली बार भारत की छठी लोकसभा के सदस्य बने। 

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कर्पूरी ठाकुर

लालू यादव, नीतीश कुमार जैसे तमाम नेताओं को राजनीति का ककहरा सिखाने वाले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को यूं ही 'जननायक' कहा जाता है। 1952 में पहली बार विधायक बने। इसके बाद बिहार विधानसभा का चुनाव कभी नहीं हारे। कर्पूरी ठाकुर दो बार मुख्यमंत्री और दशकों तक विधायक व विरोधी दल के नेता रहे। उन्होंने अपना पूरा जीवन और स्नेह जनता पर लुटा दिया।
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जगजीवन राम

'बाबूजी' के नाम से मशहूर जगजीवन राम देश के सबसे बड़े दलित नेता माने जाते थे। 1937 में पहली बार वो विधायक बने। 1946 में जवाहरलाल नेहरू की अंतरिम सरकार में वो सबसे युवा कैबिनेट मंत्री (श्रम मंत्रालय) बने। जगजीवन राम 1952 से 1984 तक लगातार सांसद चुने गए। 'बाबूजी' ने 1977 में इंदिरा को सत्ता से बेदखल कर दिया था। 

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आनंद मोहन सिंह

आनंद मोहन सिंह ने 17 साल की उम्र जेपी आंदोलन के साथ राजनीति में कदम रखा। 1983 में तीन महीने जेल की सजा काटने के बाद 1990 में पहली बार विधनसभा का चुनाव जीते और अपने दम पर पहचान बनाई।  
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ANI
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