अमर उजाला
Sat, 6 December 2025
घर को वास्तु दोषमुक्त बनाने के लिए हर दिशा के लिए मंत्र जपें।
ईशान दिशा- बृहस्पति और भगवान शिव के लिए "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" या "ॐ नमः शिवाय"।
पूर्व दिशा- सूर्य और इन्द्र के लिए "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" और "ॐ इन्द्राय नमः" (108 बार)।
आग्नेय दिशा-शुक्र और अग्नि के लिए "ॐ शुं शुक्राय नमः" और "ॐ अग्नेय नमः", ध्यान दें कि इस दिशा में पानी या शौचालय न हो।
दक्षिण दिशा-मंगल और यम के लिए "ॐ अं अंगारकाय नमः" (108 बार) और "ॐ यमाय नमः"।
नैऋत्य दिशा-राहु के लिए "ॐ रां राहवे नमः"।
पश्चिम दिशा-शनि और वरूण देव के लिए "ॐ शं शनैश्चराय नमः", किचन इस दिशा में न बनाएं।
वायव्य दिशा-चंद्र के लिए "ॐ चन्द्रमसे नमः"।
उत्तर दिशा-बुध और कुबेर के लिए "ॐ बुधाय नमः" या "ॐ कुबेराय नमः"।
घर के केंद्र में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए नियमित "गायत्री मंत्र" का जप लाभकारी।
सभी दिशाओं के दोषों से बचने और घर में सुख-शांति के लिए "संकट हरण मंत्र" का रोजाना जप करें।
दरवाजे की ओर पैर करके सोना अपशकुन क्यों?