उलझन में हूं

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Updated Thu, 02 Nov 2017 08:06 PM IST

कैसी उलझन सी है मेरी ज़िंदगी में,
तुमको देखूं तो क्यों भूल जाती हूं मै सब 
तुम्हारी आंखों में क्या गजब का जादू है,
कि जब भी देखती हूं तो बस उनमें ही खो जाती हूं ।

तुम्हारे सिवा इन आंखों को कुछ भाता ही नहीं,
जितनी मोहब्बत हमे तुमसे है कभी हुई ही नहीं 
किसी और से तुम ही हो जिसको हम कभी,
भूलते ही नहीं मेरे दिल में जो ये तस्वीर है सिर्फ।

तुम्हारी है इसको कोई और सूरत अच्छी नहीं लगती,
मेरी तकदीर हो तुम मेरी ज़िंदगी का
हिस्सा भी हो तुम, इस ज़िन्दगी में जो अगर

तुम न मिले तो हम खो जायेंगे, बस मुझे अपना
बना लो, फिर कोई उलझन ही न रहे दिल को।।

- उपासना पाण्डेय

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