गुलाबी सपने

96 Views
Updated Tue, 31 Oct 2017 05:00 PM IST

मेरे ख्वाबों में उनका आना
फिर मुझे देख कर धीरे से मुस्कुराना,
मैं भी देख कर तुम्हें पागल सी हो जाती हूं,
सारे जहां की खुशी बस तुम मे ही पा लेती हूं,
ना जाने क्यूं तुम्हारे रूठने से मेरी आंखें भर आती है,

तुम आते हो रोज
याद बनकर
और फिर यादों में हम
खो जाते हैं
इन गुलाबी ख्वाबों में हम पास
तुम्हारे आ जाते
हैं, भूल कर सारी
दुनिया को
बस तुम में ही
मिल जाते हैं !!

- उपासना पांडेय
   हरदोई, उत्तर प्रदेश

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 

अमर उजाला ऐप चुनें

सबसे तेज अनुभव के लिए

क्लिक करें Add to Home Screen