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वंदना चौधरी

मैं वंदना चौधरी लगभग पिछले 20 वर्षों से सामाजिक कार्यों में कार्यरत हूं कोई भी क्षेत्र हो महिलाओं के विषय को लेकर हमेशा उनका जागरूक करना रेलिया के माध्यम से मंच देकर के प्रोत्साहित करना उनके अधिकारों को लेकर के विचार पोस्ट किया आयोजित करना इत्यादि सबसे पहला अभियान चलाने के लिए हमने गीतांजलि संस्था बनाई जिसके माध्यम से हमने महिलाओं में जागरूकता के लिए नारा दिया आओ दादी तुम भी पढ़ लो आओ नानी तुम भी पढ़ लो आओ हम सब मिलकर पड़े यह विषय लेकर के झुग्गी झोपड़ियां में गए और महिलाओं को पढ़ाई के लिए रोड शिक्षा अभियान के तहत जागरूक किया पढ़ाई के साथ समस्या आई रोजगार की उनका रोजगार आईटी करने के लिए उनको जगह पर सिलाई सेंटर मेहंदी ढोलक सॉफ्ट टॉयज आदि के सेंटर्स खुलवाए जिनमें उनका प्रशिक्षण देकर उनको रोजगार करने के लिए सिलाई मशीनों का वितरित करते हुए उनका रोजगार की करने में गीतावली संस्था में समाज का सहयोग रहा कई बार समझ में कठिनाइयों को समाज के ताने भी सुनने पड़ते थे पर पीछे मुड़कर नहीं देखा महिला दिवस पर उन महिलाओं को सम्मानित किया जाता था जो की राज मिस्त्री का काम रिक्शा चलाने का काम या रंगाई पुताई का काम करती थी झुकी झोपड़ी में रहने वाली महिलाओं के साथ परेशानी होती थी कि उनके पति शराब पीकर बच्चों की पढ़ाई का खर्चा बहन नहीं करते थे बाल विकास के द्वारा उनको पढ़ाई के लिए प्रेरित करना उनकी साइन कल क्लासेस चल कर बच्चों को भी शिक्षित करने का संस्था ने काम किया आज अनेकों ऐसी महिलाएं हैं जो की गीतांजलि संस्था के द्वारा चलाई गई ट्रेनिंग लेकर के स्वयं रोजगार कर रही है और आर्थिक रूप से स्वावलंबी हैं बगैर किसी सरकारी मदद के विपरीत परिस्थितियों में महिलाओं के साथ खड़े होकर उनको न्याय दिलाने में उनको रोजगार करने में संस्था ने अहम भूमिका निभाई
धन्यवाद


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