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कृष्णजन्माष्टमी पर वृन्दावन में कराएं श्री कृष्ण का महाभिषेक एवं 56 भोग
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कृष्णजन्माष्टमी पर वृन्दावन में कराएं श्री कृष्ण का महाभिषेक एवं 56 भोग

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Weather Today: आज सभी जिलों में बारिश के आसार, भूस्खलन से बदरीनाथ और गंगोत्री हाईवे बंद

उत्तराखंड के सभी जिलों में आज हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। हालांकि अभी सुबह से ही राजधानी देहरादून समेत मैदानी इलाकों में धूप खिली हुई है। लेकिन, मौसम केंद्र की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार देहरादून, पौड़ी, नैनीताल, पिथौरागढ़ और बागेश्वर के ज्यादातर स्थानों पर बारिश होने की पूरी संभावना है।

जबकि उत्तरकाशी, चमोली, टिहरी, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, हरिद्वार, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। मौसम केंद्र निर्देशक बिक्रम सिंह ने बताया कि राजधानी में ज्यादातर स्थानों पर बादल छाए रहने का भी अनुमान है। कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, सुबह बदरीनाथ हाईवे भूस्खलन से लामबगड़ में बंद हो गया। गंगोत्री हाईवे पर भी आवाजाही ठप पड़ी है। 
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पंतनगर विवि के वैज्ञानिकों ने खोजी नई तकनीक, पर्यावरण को क्षति पहुंचाए बिना होगा ई-वेस्ट का निस्तारण

वैश्विक समस्या बन चुके ई-वेस्ट के निस्तारण की वैज्ञानिकों ने अब तकनीक खोज ली है। मिट्टी में इसका विघटन होता है और जलाने पर इससे निकलने वाली विषाक्त गैसें पर्यावरण सहित मानव जीवन को हानि पहुंचाती हैं। लेकिन, अब जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने 18 सालों की अथक मेहनत के बाद ई-वेस्ट के निस्तारण की बायोडिग्रेडेशन (जैव विघटन) तकनीक खोज निकाली है। गत मंगलवार को इसका पेटेंट भी इन वैज्ञानिकों को हासिल हो गया है। इससे विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल है। 

मृदा में विघटन न होने के कारण वर्तमान में ई-वेस्ट (बेकार कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, टीवी, रेडियो आदि) का उपयोग रिसाइकिल से दोयम दर्जे का प्लास्टिक बनाने में किया जाता है। इससे सस्ते एवं घटिया मानकों के घरेलू एवं इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाए जाते हैं। ई-वेस्ट की रिसाइकिलिंग से उत्सर्जित होने वाली विषाक्त गैसें पर्यावरण को प्रदूषित करती हैं।


ई-वेस्ट को जमा करके रखना तथा उनका रिसाइकिलिंग से दैनिक जीवन में उपयोगी वस्तुओं के निर्माण के लिए उत्पादों में परिवर्तित करना पर्यावरण हितैषी नहीं होता है। समस्या के समाधान के लिए पंतनगर विवि के वैज्ञानिक बीते 18 वर्षों से विभिन्न प्लास्टिक पदार्थों के बैक्टीरिया द्वारा जैविक विघटन की विधि एवं तकनीक विकसित करने में लगे थे। 
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Independence Day 2020: अमर उजाला के साथ मनाएं आजादी का जश्न, ऑनलाइन प्रतियोगिताओं में ऐसे लें हिस्सा 

अगस्त महीने में आजादी का जश्न और ऊपर से कोरोना का खतरा। लेकिन मायूस होने की जरूरत नहीं है। इस बार अमर उजाला आपके लिए लाया है आजादी के जश्न को घर बैठे ही दोगुना करने का मौका। पिछले वर्षों की अपार सफलता के बाद अमर उजाला इस साल भी स्वतंत्रता दिवस पर मां तुझे प्रणाम अभियान शुरू करने जा रहा है।

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और करवाने की जिम्मेदारी को समझते हुए ही अमर उजाला ने इस अभियान के लिए एक डिजिटल मंच तैयार किया है। इस मंच पर विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं, जिनके लिए आप भी अपनी एंट्री 11 अगस्त तक भेज सकते हैं।


इन प्रतियोगिताओं के बहाने आप और आपके बच्चे एक ओर जहां भारत माता के प्रति अपना श्रद्धाभाव प्रकट करेंगे तो दूसरी ओर प्रतिभा दिखाने का भी मौका मिलेगा।
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उत्तराखंड: शिक्षकों ने तैयार की 14 गढ़वाली गीतों की श्रृंखला, प्रदेश की संस्कृति से रूबरू कराएंगे गीत

उत्तराखंड में सरकारी शिक्षकों के समूह द्वारा गढ़वाली गीतों के माध्यम से बच्चों को राज्य का संपूर्ण ज्ञान प्रदान करने की अनूठी पहल की गई है। समग्र शिक्षा के अंतर्गत राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा तैयार 14 गीतों की इस श्रृंखला को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर रिलीज किया गया है।

गीतों की रचना करने वाले एससीईआरटी के प्रवक्ता डॉ. नंदकिशोर हटवाल ने बताया कि करीब दो साल पहले हमने गढ़वाली गीतों को शिक्षा से जोड़ने की योजना बनाई थी, जिसके तहत चयनित शिक्षकों के समूह ने सामान्य ज्ञान के विभिन्न विषयों पर आधारित गढ़वाली गीत तैयार किए।

जिन्हें बीते सप्ताह एससीईआरटी के पाठ्यक्रम शोध एवं विकास विभाग द्वारा अपने यूट्यूब चैनल में लॉच किया है। गीतों को स्वर देने वाले समग्र शिक्षा नवाचारी विभाग के जिला समन्वयक ओम बधाणी ने बताया कि गीत श्रृंखला के माध्यम से उत्तराखंड के समग्र इतिहास के साथ ही विभिन्न गायन शैली, धुनों तथा वाद्य यंत्रों की जानकारी देने का भी प्रयास किया गया है। डॉ. हटवाल ने बताया कि प्रयोग सफल रहा तो कुमाऊंनी, जौनसारी बोली भाषाओं में भी गीत तैयार किए जाएंगे।
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उत्तराखंड: दो इंजीनियरों की प्रतिकूल प्रविष्टि का मामला, सीएम के अनुमोदन के बावजूद 14 महीने दबी रही फाइल

शिक्षकों ने तैयार किए गढ़वाली गीत
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के अनुमोदन के बावजूद दो इंजीनियरों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि की फाइल अनुभाग में 14 महीने तक दबी रही। लंबे समय के बाद फाइल प्रस्तुत होने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जाहिर की और कार्रवाई के निर्देश दिए। पूरा अनुभाग बदले जाने पर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि ये अघोषित चेतावनी है, सुधर जाएं, वरना कार्रवाई से मुक्त नहीं होंगे।

बता दें कि मंगलवार को सचिव लोनिवि आरके सुंधाशु के पत्र पर एसएडी ने लोनिवि अनुभाग के एक के पूरे स्टाफ को हटाकर नया स्टाफ तैनात कर दिया। ये कार्रवाई मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर की गई थी। बुधवार को इस बारे में पूछे जाने पर मुख्य सचिव ने कहा कि 2019 में दो अधीक्षण अभियंताओं (एसई) को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई थी। इस फाइल पर मुख्यमंत्री का अनुमोदन था। उन्होंने उसी दिन फाइल अनुभाग को भेज दी थी।

लेकिन इस फाइल को अनुभाग ने जुलाई में प्रस्तुत किया गया। यानी 14 महीने बाद फाइल प्रस्तुत हुई। जबकि मुख्यमंत्री के आदेश वाली फाइल पर अधिकतम एक हफ्ते में अमल हो जाना चाहिए। अनुभाग के पास फाइल पर पुनर्विचार करने का विकल्प था। वह फाइल वापस उच्च स्तर पर भेज सकते थे। लेकिन फाइल नहीं भेजी गई। यह बहुत बड़ी गलती है। मुख्यमंत्री के निर्देश थे कि सबको बदल दो। उनके आदेश पर अमल किया गया।
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नेपाल के निर्माणाधीन सूखे बंदरगाह को भारतीय भूभाग में जोड़ने का रास्ता साफ, दिल्ली से आई टीम ने चिह्नित की जगह

नेपाल के निर्माणाधीन पुल और सूखे बंदरगाह को भारतीय भूभाग से जोड़ने का रास्ता साफ हो गया है। बनबसा के सुदूरवर्ती गांव भैंसाझाला एवं लाटाखल्ला के समीप से नेपाली पुल और सूखे बंदरगाह को जोड़ने के अलावा संयुक्त जांच चौकी (इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट) बनाने को लेकर दिल्ली से आई सर्वे टीम ने यहां जगह चिन्हित कर ली है।

संभावना जताई जा रही है कि अब नेपाल के चांदनी गांव से भारत को जोड़ने वाले रास्ते को जगबूड़ा पुल के पास एनएच से जोड़ा जाएगा। नेपाल सरकार पिछले चार वर्ष से बनबसा सीमा से लगे नेपाल के गांव चांदनी में पुल और कंचनभोग में सूखे बंदरगाह का निर्माण करवा रही है।

इसकी चेकिंग को लेकर भारत में कस्टम,  इमिग्रेशन चेकपोस्ट एवं सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त जांच चौकी (इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट) का निर्माण अब बनबसा के गढ़ीगोठ के भैंसाझाला में किया जाएगा।
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देहरादून: ठेके के सेल्समैनों पर फायरिंग में चार गिरफ्तार, इसलिए दिया था वारदात को अंजाम 

उत्तराखंड: आईएफएस अधिकारी ने किया छोटा सा प्रयोग और हाथियों से बचाई किसानों की खेती 

परंपरागत तकनीक में थोड़ा सा बदलाव कर उत्तराखंड के एक युवा आईएफएस अधिकारी ने चंपावत के एक गांव के लोगों को हाथियों से हो रहे खेती के नुकसान से निजात दिलाई। हम बात कर रहे है हल्द्वानी वन प्रभाग में तैनात 2017 बैच के डीएफओ कुंदन कुमार की। 

वन विभाग व किसान आमतौर पर हाथियों को खेतों और गांवों की ओर जाने से रोकने के लिए हाथी रोधी दीवार, खाई, बायो फेंसिंग आदि तरीके अपनाते हैं। इनमें से एक तरीका सोलर फेंसिंग का भी है। इसके तहत खेतों के चारो ओर एक ऐसी तारबाड़ डाली जाती है, जिसमें 12 वोल्ट का करंट दौड़ता रहता है। 

चंपावत के गैंडाखली गांव में कुंदन कुमार ने यही तरीका अमल में लाने के बारे में सोचा था। मुसीबत ये थी कि इसकी लागत बहुत अधिक थी। 2019 नवंबर में यहां पहुंचे कुंदन कुमार ने इसकी जगह झालर वाली सोलर फेंसिंग का इस्तेमाल करना तय किया। तरीका ये था कि तारबाड़ की जगह हवा में लटकी हुई स्टील की तारों का उपयोग किया। जिन पर सौर ऊर्जा से 12 वोल्ट का करंट दौड़ाया और किसानों के खेतों को नुकसान से बचाया। 
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