गांव पहुंचते ही छलके आंसू

Uttar Kashi Updated Thu, 08 May 2014 05:30 AM IST
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उत्तरकाशी। कई कुदरती त्रासदी झेल चुके डिडसारी गांव के लोगों में वोट के लिए उत्साह तो था, लेकिन चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही थी। एक साल से शरणार्थी के रूप में गांव से दूर सरकारी कालोनी में रह रहे मतदाता जब वोट देने गांव पहुंचे, तो उनके आंसू छलक गए।
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बुधवार को मैं जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर डिडसारी गांव के लिए चला। आपदा से इस गांव में 13 घर क्षतिग्रस्त हो गए थे और 20 से अधिक भवन खतरे की जद में हैं। मनेरी के पास गांव जाने के लिए भागीरथी पर लकड़ी का पुल बना हुआ है। पुल को छू रही गंगा के तेज प्रवाह के कारण किसी तरह पुल को पार करने की हिम्मत जुटाई। रास्ते में वोट देकर लौट रहे गांव के राजेंद्र सेमवाल एवं उनकी पत्नी बिंदेश्वरी मिली। राजेंद्र ने बताया कि कभी इस गांव में उनका घर था जो बाढ़ में तबाह हो गया। तब से हम मनेरी में सरकारी कालोनी में रह रहे हैं, लेकिन वोट देने के लिए गांव आए हैं। इसके बाद गांव के पोलिंग बूथ पर पहुंचे, तो वहां मतदाताओं की लाइन लगी हुई थी। अखिलेश सेमवाल ने बताया कि आपदा के बाद से वे बेघर हैं। रास्ते में वोट देकर लौट रही 70 वर्षीय भौंपाली देवी मिली। उन्होंने बताया कि एक साल से चार सदस्यों का परिवार शरणार्थी जीवन यापन कर रहा है।
गांव में खूब बरसे वोट
आपदा प्रभावित डिडसारी गांव में कुल 219 वोटर हैं। इसमें 8 सर्विस वोटर हैं। मतदान को सुबह से ही ग्रामीणों में खूब उत्साह दिखाई दिया। दस बजे तक 40 वोट पड़ गए थे, जबकि अपराह्न 3 बजे तक 125 मतदाताओं ने मतदान किया था।
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