पांच सालों में नहीं हुई वन्य जीवों की गणना

Uttar Kashi Updated Tue, 21 Jan 2014 05:48 AM IST
पुरोला (उत्तरकाशी)। दुर्लभ वन्य जीवों के संरक्षण के उद्देश्य से वर्ष 1957 में बनाए गए गोविंद वन्य जीव विहार में दुर्लभ वन्य जीवों की संख्या बढ़ने के बजाय घट रही है। वर्ष 2008 में कराई गई गणना के आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। शायद यही कारण है कि हर तीन साल में गणना के नियम के बावजूद पार्क प्रशासन ने वर्ष 2008 के बाद अभी तक पार्क क्षेत्र में वन्य जीवों की गणना की जहमत नहीं उठाई।
वर्ष 1957 में मोरी प्रखंड के 957.96 वर्ग किमी क्षेत्र को गोविंद वन्य जीव विहार के रूप में चिह्नित किया गया। इसमें वन्य जीवों की बहुलता वाले 472.08 वर्ग किमी हिस्से को वर्ष 1995 में गोविंद नेशनल पार्क का नाम दिया गया। दुर्लभ वन्य जीवों के नाम पर पार्क क्षेत्र में प्रतिबंध तो खूब थोपे गए, लेकिन संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में ठोस प्रयास नहीं हुए। वर्ष 2005 के बाद 2008 में हुई गणना में पार्क क्षेत्र में सिर्फ जंगली सूअरों की संख्या ही बढ़ी, शेष वन्य जीव कम रह गए। नियमानुसार हर तीन साल में पार्क क्षेत्र में वन्य जीवों की गणना कराने का प्राविधान है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं दुर्लभ वन्य जीवों के पार्क से लुप्त होने की आशंका के चलते ही तो पार्क प्रशासन गणना कराने से कन्नी नहीं काट रहा है।

गोविंद वन्य जीव विहार में वन्य जीवों के आंकड़े
वन्य जीव मई 2005 मई 2008
हिम तेंदुआ 3 3
भूरा भालू 17 4
गुलदार 32 27
घुरड़ 377 348
काकड़ 160 171
काला भालू 198 151
जंगली सूअर 363 450
कस्तूरा मृग 114 67
सांभर 154 140
भरल 167 97
कोट.........
वर्ष 2008 के बाद अभी तक पार्क क्षेत्र में वन्य जीवों की गणना नहीं कराई गई है। इस संबंध में अभी तक उच्चाधिकारियों से कोई निर्देश नहीं मिले हैं। - सुरेंद्र कुमार, उपनिदेशक गोविंद वन्य जीव।

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